23 November 2009

हमारे देश से कोई मुकाबला नहीं कर सकता (अविनाश वाचस्‍पति)


आप पढ़ रहे हैं समाचार
यही है हमारे देश का आचार
आचार जिसका बन रहा है अचार
बतलाइये इस पर आपका क्‍या है विचार।

13 November 2009

इन्‍हें तो पहचान ही जायेंगे : इस ब्‍लॉग की यह 100वीं पोस्‍ट है (अविनाश वाचस्‍पति)

तेताला ब्‍लॉग की इस एक सौ वीं पोस्‍ट पर मॉडरेशन लागू किया गया है क्‍योंकि इसमें दिए गए चित्र की लोकेशन बतलाने में अवश्‍य कठिनाई हो सकती है परन्‍तु इसमें जो मौजूद हैं उन्‍हें पहचानने में नहीं। इसलिए सोच समझ कर, पूछ ताछ करके जवाबी टिप्‍पणी दीजिए। टिप्‍पणियां 100 घंटे बाद रिलीज की जाएंगी।

मॉडरेशन की जगह त्रुटिवश टिप्‍पणी लेने पर ही रोक लग गई। जबकि टिप्‍पणी सब पाना चाहते हैं। आपको हुई असुविधा के लिए खेद है। आप पुन: पधार सकते हैं। गलती सुधार ली गई है। विश्‍वास है आपका स्‍नेह मिलेगा।

08 November 2009

मधु कोड़ा : धन का कीड़ा ? (अविनाश वाचस्‍पति)


करोड़पति कोड़ा
जरा न मीठा
सिर्फ कोड़ा
नाम है उसका
मधु कोड़ा।


नहीं रहा पास
उसके एक घोड़ा
जाता तुरंत दौड़ा
हाथ न आता
मधु कोड़ा।


माल बेहिसाब
उसने है जोड़ा
जरा न थोड़ा
धन का चटोरा
मधु कोड़ा।


इंसानी है फोड़ा
मधु नहीं जरा
भरा है मवाद
दुर्गंध की गाद
मधु कोड़ा।


घेरा उसका अब
गया है तोड़ा
मजा तब आए
न जाए छोड़ा
मधु कोड़ा।

धन का कीड़ा
देता है पीड़ा
कोई कहे हीरो
हम कहें जीरो
मधु कोड़ा।

28 October 2009

डॉगी का योगा : ब्‍लॉगर देखें : आप भी करिए (अविनाश वाचस्‍पति)


लीजिए सांध्‍य टाइम्‍स की यह खबर पढि़ए
पढ़ने के लिए उपर चित्र पर क्लिक करिए
डॉगी भी कर रहे हैं योगा
वैसे कोई क्षेत्र इनसे नहीं है छूटा
ऐसे ही जुटे रहे तो एक दिन आप देखेंगे
डॉगी हवाई जहाज भी उड़ायेंगे
उधर कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स के मद्देनजर
इन्‍हें और इनके संबंधियों को
भगाने की है योजना दिल्ली सरकार की।

आप क्‍या सोचते हैं
भगाना चाहिए
आश्‍चर्य मत कीजिएगा
एक दिन हिन्‍दी ब्‍लॉग बना लें
डॉगी महाशय।

25 October 2009

कार पर एक निबंध या कहें गाय पर शोध प्रबंध

दिल्ली शहर में अब गाय नहीं रहेगी। कार तो रहेगी पर मैं गाय की बात कर रहा हूं और आप कार की बात कर रहे हैं। भला गाय के मुकाबले में कार कहां ठहरती है पर यह ठहराने वाले पर निर्भर है कि वो किसको ठहरने दे और किसको न ठहरने दे। वैसे गाय का ठहरना जायज बनता है क्‍योंकि कार में पहिए लगे लगे होते हैं इसलिए वो क्‍यों ठहरेगी। गाय के पैर होते हैं, चलते चलते थक जाती है तो ठहर जाती है और जब ठहरे-ठहरे थक जाती है तो बैठ जाती है। अब बैठ वो सड़क पर भी सकती है बल्कि वो बैठती ही सड़क पर है, उसको सड़क पर बैठने में खूब आनंद आता है। गाय सोचती है कि मैं सड़क पर बैठूंगी तो चलती हुई कार भी ठहर जाएगी, चलते चलते थक गई होगी। यह गाय की सदाशयता की जीवंत मिसाल है जबकि कार का ठहरना थकने पर नहीं, पेट्रोल के फिनिश होने पर निर्भर करता है या जहां पर कारों के झुण्‍ड के झुण्‍ड बने हों, हर कार उसी झुण्‍ड में पार्क होने की कोशिश करती मिल जाती है। कामयाब भी हो जाती है। कई बार जब उसे झुण्‍ड से अलग कहीं और खड़ा होना पड़ता है तो उसे यातायात वाले अपनी क्रेन से खींचकर ले जाते हैं। अकेले खड़े होने का खामियाजा कार के मालिक को उसे छुड़ाकर लाने की एवज में ट्रैफिक पुलिस वालों को देना पड़ता है उसमें भी जायज और नाजायज दो कैटेगरी होती हैं। जायज में ज्‍यादा खर्च और नाजायज में कम खर्च। कार दोनों ही मामलों में बरी अगर इसे पूरा पढ़ने का मन हो तो यहां पर क्लिक करें और पढ़ने के बाद कहने का मन हो तो लिख दें बेबाक होकर

23 October 2009

दैनिक हरिभूमि में राष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह की खबर

21 October 2009

करोड़ों की तादाद में हैं नकली एंटी-वायरस (अविनाश वाचस्‍पति)


जो रक्षक हो
वही भक्षक का रूप
धर कर लुभाता है
और फंसाने में हो
जाता है कामयाब।

खबर तो यही
बतला रही है जनाब।

दैनिक भास्‍कर में दिनांक 21 अक्‍तूबर 2009 को प्रकाशित समाचार पढ़ने व जानकारी पाने के लिए उपर दिए गए चित्र पर क्लिक करे जानें और सबको बतलायें।

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