20 June 2009

रेफ्रीजरेटर जो एयरकंडीशनर का भी करेगा काम (अविनाश वाचस्‍पति)

अभी अभी एक खबर मिली है कि वैज्ञानिक रेफ्रीजरेटर यानी फ्रिज को कॉम्‍बो रूप देने जा रहे हैं। अभी तो वे फिलहाल रेफ्रीजरेटर में एयरकंडीशनर की सुविधा दे रहे हैं और भारतीय वैज्ञानिकों की यह खोज आप बजट से पहले ही बाजार में देख सकेंगे तो वे उपभोक्‍तागण जो कॉम्‍बो उपकरण लेने में यकीन रखते हैं। वे रेफ्रीजरेटर या एयरकंडीशनर खरीदने का अपना विचार कुछ दिन के लिए त्‍याग दें क्‍योंकि जो उपकरण बाजार में धूम मचाने के लिए आने और छाने वाला है। उसमें रेफ्रीजरेटर के साथ एयरकंडीशनर की सुविधा भी होगी। इसमें शुरूआती चरण में एक टन का ए.सी. होगा। जो न तो स्पिलिट होगा और न विंडो वो होगा रेफ्रीजरेटिड ए सी।
एक बार बाजार में आने के बाद इसे थ्री इन वन यानी इसमें पंखे की सुविधा भी जोड़ी जाएगी और बाद में फोर इन वन। यानी इसमें टेलीविजन की सुविधा भी जोड़ी जाएगी। इसका भविष्‍य काफी उज्‍ज्‍वल है। जिस तरह मोबाइल बहुमुखी युक्तियुक्‍त उपकरण के रूप में धाक जमा चुका है। यह रेफ्रीजरेटिड ए सी बाद में मोबाइल फोन, खुफिया डिजिटल कैमरे, एम पी 3 और 4 प्‍लेयर, डी वी डी प्‍लेयर की सुविधा से युक्‍त भी होगा।
मतलब आप एक रेफ्रीजरेटर लेकर बहुत सारे उपकरणों को खरीदने से निजात पा सकेंगे। फिलहाल इसमें वाशिंग मशीन जोड़ने की सुविधायुक्‍त करने का कार्य जोरों पर है।
आपको अब सिर्फ एक काम करना है। इंतजार तो करना ही है वो भी ज्‍यादा नहीं बजट तक। दूसरा इसकी कीमत कितनी होनी चाहिए। आपके विचारों, सुझावों को सीधे वैज्ञानिकों तक पहुंचाया जाएगा।
वैसे आज सुबह जब मैंने अपने चुटकी काटी तो दर्द नहीं हुआ जबकि मैंने कोई संज्ञाशून्‍य होने की दवा भी नहीं ली है।

05 June 2009

मोबाइल बैंकिंग कितनी सुरक्षित? (तरकश डॉट कॉम से साभार)

मोबाइल बैंकिंग कितनी सुरक्षित?

मोबाइल बैंकिंग को
कहा जा सकता है
जोखिम भरा कदम।

तरकश ब्‍यूरो के आज ही जारी इस आलेख को सतर्कता में ही बचाव के तहत साभार उद्धृत किया जा रहा है।

28 May 2009

मंत्रिमंडल में हिंदी छाई : दो बधाई

हिंदी के प्रति प्‍यार को सरकार के मंत्रिमंडल की सबसे कम उम्र की मंत्री अगाथा संगमा ने हिन्‍दी में शपथ लेकर जाहिर किया है। उनके इस जज्‍बे को सभी हिन्‍दीवासियों का सलाम है। कानून की शिक्षा प्राप्‍त अगाथा ने निश्चित ही कानूनी पढ़ाई अंग्रेजी में ही की होगी परन्‍तु शपथ हिन्‍दी में लेकर उन्‍होंने हिन्‍दी के प्रति अपनी ललक को सार्वजनिक किया है। इससे अवश्‍य ही सबको प्रेरणा लेनी चाहिए।
देश के युवा जब सत्‍ता में पहुंचकर भी हिन्‍दी को अपने व्‍यवहार की भाषा बनायेंगे और रोजमर्रा के कार्यों में प्रयोग में लायेंगे तो कोई ताकत नहीं, जो हिन्‍दी का बाल भी बांका कर सके या इसको आगे बढ़ने से रोक सके।

22 May 2009

मल्‍टीसिम मोबाइल (अविनाश वाचस्‍पति) पंगेबाज के जन्‍मदिन पर विशेष

विज्ञान का दान यह भी तो एक खोज है
पंगेबाज जी के जन्‍मदिन पर एक पंगा पंगेबाज जी को समर्पित।

एक उपकरण में सिर्फ दो सिम वाला मोबाइल तो आम है। अब एक उपकरण में 12 सिम वाले मोबाइल की चर्चा आम है। गर्मियां हैं इसलिए जिक्रे आम है। मल्‍टीसिम मोबाइल आने ही वाला है। धूमधड़ाका मचाने ही वाला है। इस आने वाले मोबाइल में एक साथ अलग अलग कंपनियों के जीएसएम, सीडीएमए, विरजिन इत्‍यादि सभी सिम कार्य कर सकेंगे। अन्‍य सभी मल्‍टीमीडिया सुविधाओं से सुसज्जित इस उपकरण में 12 सिम कार्य कर सकेंगे।

भूमंडल पर सिर्फ एक देश में अभी तक यह उपकरण उपलब्‍ध है और सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। पाठकों अगर आप देश यानी विदेश का नाम बतला पायें तो आनंद छा जाये। इससे आगे बढ़कर इसकी निर्माता कंपनी का नाम बतलाने पर आपको विजेता घोषित किया जायेगा और आपको ई+नाम प्रदान किया जायेगा। इसका विक्रय मूल्‍य अभी तक घोषित नहीं किया गया है। इसका आप अनुमान लगायें जिस तरह मैंने इस उपकरण का अनुमान लगाया है।

16 May 2009

वेटिंग वाले पी एम अब क्‍या करेंगे ? (अविनाश वाचस्‍पति)

पी एम बनने की वेटिंग में जो जो रहे हैं, वे रो रहे हैं। उनके मन, मानस में शोक पसरा हुआ है। लोकतंत्र में न घुस पाये ये स्‍वप्निल प्रधानमंत्री शोकतंत्र में डूब गए हैं। पर इन्‍होंने होश अभी भी नहीं खोया है। कुछ तो अपनी काया की माया के बूते अब भी चिंघाड़ रहे हैं जबकि उनकी चिंघाड़ अब शेरनी की दहाड़ नहीं चूहे की चिंकारी बन रही है। जिसे सिर्फ मच्‍छर, चींटी, झींगुर, मक्‍खी इत्‍यादि ही सुन पा रहे हैं जबकि वे अपने को गज मानते हैं और हैं मिलीमीटर भी नहीं। लोकतंत्र के प्रहरी बतलाते हुए फूले नहीं समा रहे थे और मजबूत लोकतंत्र को जोकतंत्र साबित करने पर तुले हुए थे परन्‍तु जनता ने जूते फेंक फेंक कर ऐसा तोला कि अब बेतोला और बेमाशा होकर सिर पीट रहे हैं। इस जूताफेंकप्रक्रिया में कुछ जूते मजबूतों की तरफ भी दौड़े पर मुड़ कर इनके सिर पर ही ताक धिनाधिन तक धिन्‍ना तक धिन्‍ना का सुर बज रहा है और ये इसे बेसुरा ही बतला रहे हैं। इस बेसिरे की सुरबन्‍दी इनमें सुरसराहट भर रही है। इस सुरसराहट के बूते तो ये सरकार की तरफ सरक भी नहीं पा रहे हैं। जितना सरकने की कोशिश करते हैं उतना ही उल्‍टी तरफ रपट जाते हैं और फिर इनके सरकने रपटने की रपटें मीडिया की सुर्खियां बन जाती हैं और अपनी हास्‍यास्‍पदता में रमे हुए इस मुगालते में खुश होते रहते हैं कि भय हो कहने के बाद जय हो तो अपनी ही होनी है।
जिन्‍हें कमजोर बतलाया जा रहा था, जिनसे डराने के लिए भय हो गाया जा रहा था, वे महामजबूत हैं। ये जन जन नहीं हैं पर जनता के मन हैं। मन से इन्‍हें मान लिया गया है इसलिए भरपूर प्‍यार बल्कि प्‍यार का सागर बना दिया गया है। लोकतंत्र को जोकतंत्र बनने की प्रक्रिया रूक चुकी है। अब देखें कौन डूबता है, कौन डूबा हुआ है और कौन डूबेगा ?

08 May 2009

सत्यार्थमित्र: हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया... गोष्ठी की तस्वीरें

सत्यार्थमित्र: हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया... गोष्ठी की तस्वीरें

29 April 2009

जूता चैनल लांच हो : जूते में व्‍यवसाय की उपजती संभावनाएँ : महिलाओं के लिए बेहतरीन अवसर (अविनाश वाचस्‍पति)

जूते के जमने और न थमने की उड़ानों को ध्‍यान में रखते हुए अनुरोध है कि मीडिया जगत एक जूता चैनल लांच करे। जिसमें जूते संबंधी सभी प्रकार की घटनाओं को प्रसारित किया जाए। मंदी के दौर के बाद आते तेजी के दौर में जितनी तेजी जूतों के दौड़ने में आई है, उतनी तेजी और किसी में नहीं है। इससे बचने वाले भी मंदी में हैं। जूता चलता है पर लगता नहीं है। इस संबंध में शोध की व्‍यापक संभावनाएं हैं।

जूता चैनल लांच होने के बाद जूता मंत्रालय का गठन प्रस्‍तावित है। जूता चलाने के लिए लांचर भी लांच किए जाने चाहिए और जूता फेंकने और निशानेबाजी के सरकारी प्रशिक्षण संस्‍थान आरंभ किए जाने चाहिए। प्राइवेट और फर्जी तो अपने आप ही खुल जाएंगे। जूता चलाने में डिग्री, डिप्‍लोमा पाठ्यक्रम (6 महीने, एक साल और तीन साल की अवधि) भी आरंभ किए जाएं और इसके लिए शैक्षणिक योग्‍यता का कोई बंधन न हो, निरक्षर भी इसमें दक्षता हासिल करने के लिए योग्‍य माना जाए। जिस प्रकार सत्‍ता में आने और उसे पाने के लिए ऐसी योग्‍यताएं तो अयोग्‍यताएं ही समझी जाती हैं। उसी प्रकार जूता पाठ्यक्रम में भी इसी प्रकार की व्‍यवस्‍था की जाए।

जो महानुभाव अब तक जूता चला चुके हैं और जो बच चुके हैं। उनके भाषण कराये जायें। जूता दिलों को जला भी रहा है। किसके दिलों को .......... यह विलोकना अभी बाकी है। इसे बाकी ही रहने दिया जाए।


पाठ्यक्रम स्‍थल पर व्‍यावहारिक योग्‍यता हासिल करने के लिए अपनी पसंद के नेताओं के डमी पुतलों पर निशाना साधना सिखाया जाए। इस संबंध में गौरतलब है कि अभी तक जूता फेंकने में पुरुषों का वर्चस्‍व है। इस वर्चस्‍व को महिलाओं द्वारा तोड़े जाने की व्‍यापक संभावनाएं हैं। इसमें प्रथम महिला का रिकार्ड बना कर चर्चा में आया जा सकता है। जूता चैनल ऐसी किसी घटना से ही शुभारंभ करे तो मुफीद रहेगा।

मैंने तो चर्चा के लिए विषय दिया है, इस पर आपकी सबकी तीक्ष्‍ण प्रतिक्रियाएं अपेक्षित हैं

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